मार्गीशीर्ष पूर्णिमा

धर्म/अध्यात्म (Rashtra Pratham) मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत होता है। इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा 29 दिसंबर को है। कार्तिक पूर्णिमा की तरह मार्गशीर्ष पूर्णिमा का भी विशेष महत्व होता है। स्नान और दान के लिए यह पूर्णिमा बहुत ही शुभफलदायक बताई गई है।

29 दिसंबर को सुबह 7.54 मिनट से शुरू होगी और 30 तारीख को 8.58 बजे खत्म होगी। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सतयुग काल की शुरुआत हुई थी। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन गीता पाठ करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। इस दिन सूर्य देव और चंद्र देव अपने समसप्तक अवस्था में होते हैं।

इस पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा भी कहते हैं। दरअसल मान्यता है कि इस दिन आप जो भी दान करते हैं उसका फल अन्य पूर्णिमा की अपेक्षा 32 गुना अधिक प्राप्त होता है। इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा कहा जाता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा करने से भगवान नारायण प्रसन्न होते हैं। पूर्णिमा के अघले दिन स्नान करें और पूजा कर जरुरतमंद व्यक्ति और ब्राह्मण को भोजन कराए। इसके बाद दान-दक्षिणा देकर अपना व्रत खोलें।