कामगारों के खिले चेहरे बता रहे बदले-बदले से नजर आ रहे इंजीनियर साहब

इंजीनियर साहब ने जबसे शहर की बागडोर संभाली है, सबकुछ ‘उथल-पुथल’ हो गया है। मातहत नाराज, ‘मुखिया’ नाराज, ‘कामगार’ भी नाराज चल रहे हैं। कह रहे हैं कि इंजीनियर किसी की सुनते ही नहीं। जो मन में आया किये जा रहे हैं। ‘सर्विस बिल्डिंग’ में भय का माहौल बना हुआ है। अक्सर शांत रहने वाले ‘मुखिया’ के विरोध के स्वर भी फूट रहे हैं। उनकी तमाम फाइलें धूल फांक रही हैं। इंजीनियर साहब परिस्थितियां भांप चुके है। परिवर्तन की शुरूआत ‘कामगारों’ से की है। अवकाश से लौटकर सबसे पहला काम इन्हीं को मनाने का किया। तमाम मांगे थीं इन ‘कामगारों’ की। कुछ पर समझौता हो गया है, बाकी पर भरोसा दिलाया है। इंजीनियर साहब के केबिन से निकले ‘कामगारों’ के चेहरे खिले हुए थे। साफ नजर आ रहा था कि दूरियां कम हो रही हैं। अब इंजीनियर साहब शहर के ‘मुखिया’ और मातहतों को मनाने की कोशिश में हैं।