Sports (Rashtra Pratham) :- सोनकपुर स्टेडियम में अभी खेलों की स्थिति खराब है। एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा खिलाड़ी होने के बाद भी इसके कोच अभी तक खेल निदेशालय से नहीं मिले हैं। मार्च 2020 में कोरोना के दौरान लगे लाकडाउन से एथलेटिक्स के कोच नहीं है। इससे एथलेटिक्स खिलाड़ियों की प्रतिभा पर लाकडाउन ही लगा है।एथलेटिक्स के के खिलाड़ी स्टेडियम में करीब 300 हैं, जो रोजाना सुबह और शाम इस उम्मीद में दौड़ते और कूदते हैं कि एथलेटिक्स की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर सकेंगे। लेकिन, बिना कोच के इस खेल की प्रतिभाएं नहीं उभर रही हैं। हाल ही में अब एथलेटिक्स खेल होने वाले हैं।
इसको लेकर सीनियर खिलाड़ियों के भरोसे जूनियर खिलाड़ी हैं। एथलेटिक्स खेल के जरिए पुलिस, फौज में भर्ती होने का अच्छा अवसर मिलता है। जिससे करियर भी प्रभावित हो रहा है। दौड़ व कूद में सबसे ज्यादा खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इस खेल को लेकर छोटे-छोटे बच्चों में उत्साह है। स्कूलों में पढ़ने वाले खिलाड़ी माध्यमिक स्कूलों के खेलों के लिए तैयारी करने से भी वंचित हैं।: स्कूलों में एथलेटिक्स खेल के मैदान न होने से खिलाड़ी सोनकपुर स्टेडियम में आते हैं। लेकिन, उन्हें इसका माहौल नहीं मिल रहा है। माध्यमिक खेल भी कोरोना काल से नहीं हुए हैं। लेकिन, खिलाड़ी खुद को खेलों के लिए तैयार कर रहे हैं। सोनकपुर स्टेडियम में हाल ही में हाकी, फुटबाल, हाकी व क्रिकेट के कोच मिले हैं। इन खेल से अधिक एथलेटिक्स में कोच हैं, लेकिन अभी तक यह कोच नहीं मिले हैं।
वरिष्ठ खिलाड़ियों से टिप्स लेकर तैयारी करते हैं। इस खेल के भी कोच खेल निदेशालय से मिलने चाहिए।
प्रीति, एथलेटिक्स खिलाड़ी
एथलेटिक्स खेलों के खिलाड़ी सबसे अधिक हैं। लेकिन, कोच न होने से इस खेल की दुर्गति भी सबसे ज्यादा हो रही है।
अभिषेक पाल, एथलेटिक्स खिलाड़ी
डेढ़ साल से बिना कोच के तैयारी करना मुश्किल है। कोच अपने अभ्यास को उसी तरह देखते हैं। बिना कोच के केवल काम चल रहा है।
मंजू, एथलेटिक्स खिलाड़ी।
खिलाड़ियों में एथलेटिक्स खेल के प्रति जुनून है। लेकिन, स्टेडियम में बिना कोच के तैयारी प्रभावित हो रही है। अमन कुमार, एथलेटिक्स खिलाड़ी