21 फरवरी तक चलेंगे गुप्त नवरात्र, ऐसे करें कलश स्थापना

धर्म/अध्यात्म (Rashtra Pratham)  वर्ष में नवरात्रि दो बार आते हैं। चैत्र मास में वासंतिक नवरात्रि और आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि होते हैं। यह दोनों नवरात्रि मौसम परिवर्तन की संधियों में होते हैं। शारदीय नवरात्र आने से शीत ऋतु का आगमन हो जाता है और वासंती नवरात्रों के बाद गर्मी का मौसम आरंभ हो जाता है। इन दोनों नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। ये हैं आषाढ़ मास और माघ मास में। इस वर्ष माघ मास की गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी दिन शुक्रवार से 21 फरवरी दिन रविवार तक रहेंगी। गुप्त नवरात्रि में साधक गण विशेष रुप से तांत्रिक लोग महासरस्वती, महाकाली और महालक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं। 10 महाविद्याओं की स्वामिनी मां कालिका, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी इन 10 माताओं की विशेष पूजा होती है। गुप्त नवरात्रि में इन माताओं की पूजा करने से व्यक्ति को सिद्धि मिलती है और वह समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बन सकता है। प्रातः 8:34 से 10:00 बजे तक। मध्यान्ह अभिजीत मुहूर्त 11:24 से 12:36 बजे तक कलश स्थापना के बहुत शुभ  मुहूर्त हैं। मंत्र सिद्धि के इच्छुक गृहस्थी लोग एवं मां भगवती के साधक नवरात्रों में उपरोक्त 10 महाविद्याओं की साधना करके सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं।