लोहड़ी को देश-विदेश में बसे पंजाबियों ने ग्लोबल फेस्टिवल बना दिया

धर्म/अध्यात्म (RASHTRAPRATHAM): साल 2021 का लोहड़ी पर्व इस मायने में खास है कि पिछले साल की दुश्वारियों के बाद लोगों को इस साल यह पहला उत्सव और उल्लास मनाने का अवसर प्रदान करेगा। कोरोना काल में साल 2020 के सभी त्योहार प्रतीक रूप में ही मनाये गये लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के गिरते मामलों और वैक्सीन आ जाने की खबर ने लोहड़ी पर्व की मस्ती को और बढ़ा दिया है लेकिन अभी हमें यह ध्यान रखना होगा कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। लोहड़ी पर्व के धार्मिक महत्व की चर्चा करें इससे पहले आपको याद दिला दें कि हमें इस पर्व की मस्ती में स्वास्थ्य संबंधी सरकारी सुझावों को नहीं भूलना है और फेस मास्क तथा सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखने का ख्याल रखना होगा।

लोहड़ी पर्व की महत्ता

वैसे तो लोहड़ी पर्व पंजाब में मनाया जाने वाला त्योहार है लेकिन देश-विदेश के कोने-कोने में बसे पंजाबियों ने इसे ग्लोबल फेस्टिवल बना दिया है और हर जगह ढोल, डीजे पर आपको लोहड़ी मनाते हुए सभी संप्रदायों के लोग दिख जाएंगे। लोहड़ी पर्व के मनाये जाने के पीछे एक प्रचलित लोक कथा भी है कि मकर संक्रांति के दिन कंस ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने खेल–खेल में ही मार डाला था। उसी घटना की स्मृति में लोहिता का पावन पर्व मनाया जाता है। सिन्धी समाज में भी मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व ‘लाल लाही’ के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। यह भी कहा जाता है कि लोहड़ी पर्व के दिन से ही धरती सूर्य से अपने सुदूर बिन्दु से फिर दोबारा सूर्य की ओर मुख करना प्रारम्भ कर देती है।

 

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