सुख, समृद्धि और सफलता दिलाएगा उत्पन्ना एकादशी व्रत

धर्म/अध्यात्म (Rashtra Pratham) भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत बहुत ही पावन व्रत है। उत्पन्ना एकादशी व्रत को लेकर मान्यता है कि इस दिन एकादशी माता का जन्म हुआ, इसलिए इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी नाम से जाना जाता है। माता एकादशी को भगवान विष्णु की शक्ति माना गया है। इस एकादशी पर कुछ खास उपाय कर सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है।

उत्पन्ना एकादशी पर भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। इस व्रत में पूरा समय सत्कर्मों में ही व्यतीत करें। एकादशी पर घर में पौधारोपण करें और तुलसी का एक पौधा घर के पूर्व दिशा में लगाएं। विवाह संबंधी परेशानी दूर करने के लिए इस दिन केले के वृक्ष की जड़ में दीपक जलाएं। एकादशी के दिन घर की छत पर गेंदे का पौधा भी लगा सकते हैं। घर की छत पर पीला ध्वज भी लगा सकते हैं। जो लोग एकादशी व्रत नहीं कर पाते हैं, उन्हें इस दिन सात्विक रहना चाहिए। एकादशी को चावल नहीं खाना चाहिए। एकादशी पर अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए और ज़रूरतमंदों को दान अवश्य देना चाहिए। जो एकादशी का व्रत करने के इच्छुक हैं तो उन्हें उत्पन्ना एकादशी से ही इस व्रत का आरंभ करना चाहिए। इस व्रत में भगवान विष्णु का ध्यान कर भजन कीर्तन करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद भी भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें फलों या मिठाई का भोग लगाएं। एकादशी की रात्रि में भगवान श्रीहरि का स्मरण कर जागरण करना चाहिए। इस व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय होने पर किया जाता है।