बरेली में अवध के रामलीला कलाकार 64 वर्षों से अपनी परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं। वे गांव-गांव जाकर रामलीला का मंचन कर आस्था की लौ जला रहे हैं, जिसमें भमौरा और मवई जरेल में आगामी आयोजन शामिल हैं।
शाम ढलते ही कैंट-जंक्शन मार्ग स्थित शिविर में चहल-पहल बढ़ जाती है। कोई कलाकार मुकुट संभालता है तो कोई धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाता है। कुछ कलाकार दर्पण के सामने खड़े होकर अपने संवाद दोहराते हैं। यही कलाकार मंच पर पहुंचते हैं तो उनके वास्तविक नाम पीछे छूट जाते हैं।
कोई भगवान राम, लक्ष्मण और सीता बन जाता है तो कोई कैकेई और रावण का किरदार निभाता है। इन दिनों भमौरा में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है।
नाथ नगरी में रामलीला की इसी परंपरा को जीवंत रखने के लिए अवध व तराई के रामलीला कलाकार दशकों से यहां आते रहे हैं। सरयू तीरे बसी अयोध्या के दरबार के त्रेतायुग का सचित्र बखान करने वाले अवध दरबारी (लखनऊ मंडल के रामलीला कलाकार) इन दिनों कैट-स्टेशन मार्ग पर शिविर लगाकर ठहरे हुए हैं।