निंदिया के मातल दूल्हा…” गीत मिथिला में दूल्हे के स्वागत और उसकी सुंदरता की तारीफ के लिए गाया जाता है।
मॉडर्न इंडिया में लोग डेस्टिनेशन वेडिंग और थीम वेडिंग पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, जिसमें लोकगीतों के बजाय डीजे पर लेटेस्ट गानों को बजाने का चलन है। पर आज भी सदियों से शादी-ब्याह में गाए जाने वाले विवाह गीतों के आगे ये सभी गाने फीके नजर आते हैं। इन्हीं में से एक परिछन गीत है “निंदिया के मातल दूल्हा…” जिसे मिथिला में शादियों के समय गाया जाता है।
परिछन जिसे आम बोलचाल में कभी-कभी परछन भी कह दिया जाता है, स्वागत और टोटके से जुड़ा शब्द है। उत्तर भारत में खासकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार के मिथिला क्षेत्र में परिछन शादी के समय निभाई जाने वाली एक रस्म है। जब बारात मुख्य द्वार पर आती है, तब दूल्हे की नजर उतारने और उसे बुरी नजर से बचाने के लिए इस रस्म को किया जाता है। इसी दौरान महिलाएं परिछन गीत गाकर माहौल को खुशनुमा करती हैं।