EC: सरकार के इशारे पर काम करता था चुनाव आयोग

उभरता भारत (Rashtra Pratham): सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपने फैसले में सर्वोच्च अदालत ने कहा, चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया वैसी ही होनी चाहिए, जिस तरह से केंद्रीय जांच एजेंसी ‘सीबीआई’ के निदेशक की नियुक्ति होती है।

यानी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश रहें। यह कमेटी जिन नामों की सिफारिश करेगी, उसे राष्ट्रपति अपनी मंजूरी देंगे। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी उक्त मामले को लेकर याचिका लगाई थी। उन्होंने मामले की पैरवी की। सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद, प्रशांत भूषण ने कहा, यह फैसला लोकतंत्र पर असर डालेगा। अभी तक तो चुनाव आयोग, सरकार के इशारे पर ही काम करता रहा है।

लोकतंत्र में वोट की ताकत सुप्रीम … 

बता दें कि अभी तक जो चयन प्रक्रिया है, उसमें केंद्र सरकार ही मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्तों का चयन करती है। सर्वोच्च अदालत ने कहा, संसद द्वारा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जब तक कोई कानून नहीं बनाया जाता, तब तक यही प्रक्रिया जारी रहेगी। जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा, लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखी जानी चाहिए। लोकतंत्र में वोट की ताकत सुप्रीम होती है। इसके माध्यम से मजबूत पार्टियां भी सत्ता से बाहर हो सकती हैं।

चुनाव आयोग को अपनी ड्यूटी, संविधान के प्रावधानों के मुताबिक और कोर्ट के आदेशों के आधार पर निष्पक्ष रूप से कानून के दायरे में रहकर निभानी चाहिए। बता दें कि चुनाव आयुक्तों के चयन की मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथ में है।

इसी वजह से कई अवसरों पर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत करते हुए कहा, यह एक दूरगामी फैसला है। अभी तो यही देखने को मिला है कि सरकार जिसे चाहे, चुनाव आयुक्त बना दे।