त्योहारों के उल्लास में लोगों की बेपरवाह भीड़ पर कोरोना की नजर..

कोरोना की दूसरी लहर के चरम के बाद अब देश में संक्रमण दर स्थिर हो गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोरोना संक्रमण खत्म हो गया है। वह अब भी हमारे आसपास मौजूद है। खुद को जिंदा रखने और संख्या बढ़ाने के लिए जरूरी नई-नई जीवित कोशिकाओं के लिए उसे मौके की तलाश है और इसमें मददगार हो रही है पर्व, त्योहारों पर उमड़ने वाली बेपरवाह भीड़। केरल में ओणम, महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी और दिल्ली में ईद व रक्षाबंधन, हर त्योहार के बाद कोरोना संक्रमितों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। देश में दुर्गा पूजा के साथ त्योहारी माह की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में हमारी थोड़ी सी चूक तीसरी लहर के लिए आमंत्रण साबित हो सकती है।कोरोना वायरस संक्रमित की छींक, खांसी या सांस से निकले ड्रापलेट्स से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। दो गज के दायरे में यदि कोई स्वस्थ जीवित कोशिका नहीं मिलती है तो वायरस जमीन पर गिरकर नष्ट हो जाता है। त्योहारी दिनों में लोग संक्रमण का खतरा भूल जाते हैं और करीब से बात करना और घूमना शुरू कर देते हैं। ध्यान रहे कि मास्क हटाने की आदत संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती है। एक संक्रमित व्यक्ति हजारों लोगों को बीमार कर सकता है। इसके अलावा प्रदूषण बढ़ने से कोरोना संक्रमण के गंभीर परिणाम आने की आशंका भी बढ़ जाती है। यदि सावधानी नहीं बरती गई तो अस्पतालों में दूसरी लहर के चरमकाल जैसा दृश्य दोबारा देखने को मिल सकता है। दूसरी लहर के दौरान सरकारी तो सरकारी निजी अस्पतालों में भी लोगों को बेड नहीं मिल रहे थे।पर्व-त्योहार हों या शादी-विवाह दोनों में लोग घरों में न केवल जमा होते हैं, बल्कि अपनापन और प्यार बांटने में लापरवाह हो जाते हैं। लोग रिश्तेदारों के बीच न केवल आराम से बैठते हैं, बल्कि मास्क पहनना भी आवश्यक नहीं समझते हैं। बच्चे तो ऐसे में किसी नियम को मानते ही नहीं हैं। बेहतर होगा कि त्योहार की खुशियां इस वर्ष भी डिजिटल प्लेटफार्म पर मनाई जाएं। वहीं स्कूल हो या रिश्तेदारों का घर, बच्चों को मास्क पहनकर ऐसे खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें जिनमें वे दो गज की दूरी बनाकर रखें।