तेरह भूखंड घोटाले के मास्टरमाइंड थे दो बाबू

लखनऊ विकास प्राधिकरण में तेरह भूखंड घोटाल करने वाले निलंबित बाबू पवन कुमार ने एक और बाबू का नाम लिया था। संबंधित बाबू ही राम किशोर तिवारी और फैय्याज से मिलकर भूखंडों के फर्जी प्रपत्र तैयार करवाता था। इसके बाद गोमती नगर भूखंडों की रजिस्ट्री कराने का काम जेल में बंद पवन कुमार कराते थे।इस पूरे खेल का खुलासा पूछताछ में पवन बाबू ने पुलिस के सामने खुलकर किया था। वहीं गोमती नगर पुलिस तेरह मुकदमों को दर्ज तो शुक्रवार को कर लिया था, लेकिन चार दिन बाद भी किसी तह तक नहीं पहुंच सकी है। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। हालांकि नवंबर 2020 से जो भी मामले गोमती नगर थाने में लविप्रा ने दर्ज कराए, उनकी विवेचना की रफ्तार इतनी सुस्त हैं कि आज तक दर्ज हुए दो दर्जन से अधिक मुकदमों में एक भी सफलता पुलिस को नहीं मिली। उधर उपाध्यक्ष ने जब निलंबन पत्र थमाया तो आरोपी के चेहरे पर न तो चिंता थी और न कोई गलतियों का पछतावा। सुकून से निलंबन पत्र शर्ट की ऊपरी जेब रखकर अफसरों के सवालों का जवाब देता रहा। पुलिस को शुक्रवार देर रात जब थाने ले जाया गया तो पवन ने पुलिस को बताया कि उसे अभी एक एक भूखंड की रजिस्ट्री कराने पर पचास हजार से एक लाख रुपये ही मिला था। कुल पांच से छह लाख रुपये ही आया था। नवरात्रि में बड़ी रकम आनी बाकी थी। इन भूखंडों को नवरात्रि में बेचने की तैयारी थी। मौके पर राम किशोर तिवारी और फैय्याज खरीददारों को भूखंड दिखाने के लिए मौके पर ले जाकर दिखाते थे। मास्टरमाइड दूसरा बाबू भूखंडों के प्रपत्र तैयार करवाने में मदद करता था और अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर बनवाने में भी। इसके अलावा संबंधित पार्टी को कोई शक न हो तो उसके लिए पहले उन भूखंडों को बेचेने की तैयारी थी, जो लविप्रा के कम्प्यूटर पर चढ़े थे। ऐसे भूखंडों की संख्या नौ थी। कौन सा भूखंड खाली है और कौन सा किस्ते जमा न होने के कारण निरस्त किया गया है, यह जानकारी सिर्फ प्राधिकरण बाबू को होती है। दलालों ने पूरी साठगांठ करते हुए इन भूखंडों का ब्योरा बाबुओं से एकत्रित किया और फर्जी प्रपत्र तैयार करवाकर पूरा खेल कर दिया।