लखीमपुर खीरी हिंसा केस: आरोपी आशीष मिश्रा को मिली अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को जमानत देते हुए यह शर्त भी लगाई है कि वह दिल्ली एनसीआर और उत्तर प्रदेश में नहीं रहेगा। जमानत मिलने के बाद एक हफ्ते बाद आशीष मिश्रा को उत्तर प्रदेश छोड़ना होगा। जस्टिस सूर्याकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आशीष जमानत अवधि के दौरान ना उत्तर प्रदेश में रहेगा और ना ही दिल्ली एनसीआर में। सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर बीती 19 जनवरी को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि उनका मुवक्किल बीते एक साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है और जिस तरह से ट्रायल चल रहा है, उस तरह इसे पूरा होने में 7-8 साल का समय लगेगा। मुकुल रोहतगी ने ये भी कहा कि मामले में जिस जगजीत सिंह ने शिकायत की है, वह घटना का चश्मदीद गवाह नहीं है और उसकी शिकायत सिर्फ अफवाह पर आधारित है। रोहतगी ने ये भी कहा था कि उनका मुवक्किल अपराधी नहीं है और ना ही उसका आपराधिक इतिहास है।

बता दें कि तीन अक्टूबर 2021 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में किसान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि आशीष मिश्रा की कार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने एसयूवी सवार लोगों पर हमला कर दिया था, जिसमें कार के ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी। हिंसा के दौरान एक पत्रकार की मौत समेत इस मामले में कुल आठ लोगों की जान गई थी। आशीष मिश्रा इस मामले में मुख्य आरोपी है। आशीष मिश्रा ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि पीड़ित पक्ष को पर्याप्त मौका देकर ही हाईकोर्ट जमानत याचिका पर फैसला सुनाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने फिर से मामले पर सुनवाई की और आशीष मिश्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इस पर आशीष मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जहां से अब आशीष मिश्रा को आठ हफ्ते की सशर्त जमानत मिल गई है।