फ्रांस की राष्ट्रीय परेड में मोदी मेहमान, 269 भारतीय सदस्यों की ट्राइ सर्विसेंज कॉटिजाइंट शामिल

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रोन फ्रांस के पेरिस में बैस्टिल दिवस समारोह में भाग ले रहे हैं। देश में दंगों के दो सप्ताह बाद कड़ी सुरक्षा के बीच इसका आयोजन किया जा रहा है। देश भर में लगभग 45,000 पुलिस तैनात की गई, जबकि आतिशबाजी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पेरिस में बैस्टिल डे परेड में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लेने के अलावा पीएम नरेंद्र मोदी परेड में भाग लेने वाले भारतीय त्रि-सेवा दल के साथ-साथ राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मुलाकात करेंगे। फ्रांस को आप देखिए तो यूरोप में उसकी ताकत, उसकी क्षमता भारत के साथ सामरिक और रणनीतिक रूप से खड़ा रहना। दूसरी तरफ भारत कैसे एक उभरती ताकत के रूप में पूरे विश्व में अपना डंका बजा रहा है। कई मायनों में ये बेस्टिल डे परेड सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। ऐसे में आइए आपको थोड़ा इसके इतिहास के बारे में भी बता देते हैं।

बैस्टिल दिवस का इतिहास और महत्व

बैस्टिल डे को ‘फेटे नेशनले फ्रांसेइस या राष्‍ट्रीय दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। 14 जुलाई सन् 1789 में हुई फ्रांसीसी क्रांति के दौरान इस दिन बैस्टिल के किले पर हमला हुआ था। 14 जुलाई, 1789 को फ्रांस के लोगों ने हथियार जब्त कर बैस्टिल पर धावा बोल दिया और वहां से सात कैदियों को रिहा कर दिया। यह अवसर ‘प्राचीन शासन’ (पुराने शासन) से जनता की पहली जीत का प्रतीक है। बैस्टिल को बाद में ज़मीन पर गिरा दिया गया। वह दिन जब लोगों ने अपनी जीत हासिल की और राजा लुई सोलहवें के कठोर शासन को उखाड़ फेंका। एक साल बाद 1790 में, फेटे डे ला फेडरेशन (संघों का पर्व) ने बैस्टिल के पतन का जश्न बड़े उत्साह के साथ मनाया। तब से, 14 जुलाई फ्रांसीसी गौरव और संस्कृति का एक प्रमुख मार्कर बन गया है और फ्रांसीसी लोगों की एकता का जश्न मनाने के लिए हर साल बैस्टिल दिवस मनाया जाता है।

269 सैनिकों वाली टुकड़ी मार्च करती आएगी नजर

भारत ने 269 सदस्यों की एक ट्राइ सर्विसेंज कॉटिजाइंट फ्रांस को भेजा है। भारत ने भारतीय सैन्य टुकड़ी फ्रांस में भेजी है उनमें इंडियन आर्मी, इंडियन एयरफोर्स और इंडियन नेवी में से चुने गए हैं। ये फ्रांस के भीतर बेस्टाइल डे परेड के दिन फ्रांस के ट्रूप के साथ कदमताल करेंगे और परेड में हिस्सा लेंगे। सेना की टुकड़ी का प्रतिनिधित्व पंजाब रेजिमेंट द्वारा किया जा रहा है जो भारतीय सेना की एक सबसे पुरानी रेजिमेंट है। इस सैन्य टुकड़ी में राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट बैंड भी शामिल है। ये रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ राइफल रेजिमेंट है।