कोरोना काल के बाद विदेशी मेहमानों की भारत यात्रा का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। इस बात के संकेत इस बात से मिल रहे हैं कि डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिक्सन नौ से 11 अक्टूबर तक तीन दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच रही हैं। वैसे पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिका, आस्ट्रेलिया समेत कुछ दूसरे देशों के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों ने भारत का दौरा किया है, लेकिन कोरोना की पहली लहर के बाद किसी देश के प्रमुख की यह पहली यात्रा होगी।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ फ्रेडरिक्सन की द्विपक्षीय वार्ता में ग्रीन एनर्जी का मुद्दा सबसे अहम रहेगा। भारत ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान यूरोपीय संघ के छोटे-छोटे देशों के साथ जिस तरह संबंधों को मजबूत बनाना शुरू किया है, डेनमार्क की प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि डेनमार्क की प्रधानमंत्री की भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मुलाकात होगी और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी।28 दिसंबर, 2020 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की अगुआई में वर्चुअल बैठक हुई थी जिसमें हरित रणनीतिक साझेदारी (ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप) की स्थापना की घोषणा हुई थी। दोनों नेता इस बात की समीक्षा करेंगे कि घोषणा के बाद इस दिशा में कितना आगे बढ़ा गया है। बैठक में कारोबार और आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दे भी काफी अहम होंगे। अभी 200 से ज्यादा डेनमार्क की कंपनियां भारत में कार्यरत हैं, जबकि 60 भारतीय कंपनियां वहां काम कर रही हैं। रिन्यूबल एनर्जी, कृषि, पशुपालन, स्वच्छ तकनीक के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने की अपार संभावनाएं हैं।