बिहार के राजनीतिक माहौल में सभी चल रहे अपने-अपने दांव

सियासत की बातें (Rashtra Pratham) :- उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बन रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बदल दिया और जिसके कारण बदला वही प्रदेश अध्यक्ष इस्तीफा देकर फजीहत करा बैठा। बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा अपनी सीट पर लगी है। वोट पड़ चुके हैं और आज नतीजा आना है। ऐसे राजनीतिक माहौल में बिहार भी शांत नहीं है। यहां भी सभी अपने-अपने दांव चलने में लगे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता विपक्ष तेजस्वी यादव में मुद्दे छीनने की होड़ लगी है तो लोक जनशक्ति पार्टी में चाचा पारस और भतीजे चिराग में चुनाव चिन्ह बंगले को लेकर लड़ाई तेज हो चली है। कन्हैया कुमार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छोड़ कांग्रेस की बंशी बजाने चल दिए हैं।बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग पुरानी है। नीतीश कुमार इसे लेकर चुनावी मैदान में भी उतर चुके हैं, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी।

अभी सोमवार को जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि हम थक गए इसकी मांग करते-करते इसलिए अब विशेष पैकेज मांगे जाएंगे। बात व्यावहारिक थी, कई बार ऐसे पैकेज बिहार को मिले भी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनावी मंच से भी इसे बता चुके हैं। विजेंद्र यादव की बात का समर्थन राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी किया, लेकिन विपक्ष ने इसे मुद्दा बना दिया। मंगलवार को तेजस्वी यादव ने यह घोषणा कर दी कि अगर आगामी लोकसभा चुनाव में हमारे पास 40 में 39 सीटें आ जाती हैं तो प्रधानमंत्री कोई भी हो, बिहार आकर मांग पूरी करेंगे। नीतीश ने इसे दिल पर ले लिया और अगले दिन स्पष्ट कर दिया कि हम पीछे नहीं हटे हैं, यह हमारी पुरानी मांग है।

भले ही पूरा न हो, लेकिन मुद्दा फिर जिंदा हो गया है। जातिगत जनगणना के बाद यह दूसरा अवसर है जब तेजस्वी द्वारा बनाए जा रहे मुद्दे को लपक कर नीतीश अगुआ बने हैं, लेकिन तेजस्वी भी पीछे नहीं हैं। इधर नीतीश विशेष राज्य के मुद्दे पर बोले तो बिहार की नदियों को जोड़ने का मुद्दा उठा उन्होंने नीतीश के लिए एक पिच और तैयार कर दी है। अब देखना है कि इस पर नीतीश कब आते हैं?