समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गाजीपुर बार्डर पर किसान की आत्महत्या की घटना के लिए रविवार को भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दोषी ठहराया। अखिलेश ने रविवार को ट्वीट किया, ‘किसान आंदोलन में गाजीपुर बार्डर पर वयोवृद्ध किसान की आत्महत्या की खबर बेहद दुखद है, श्रद्धांजलि। किसान अपने भविष्य को बचाने के लिए जान दे रहा है, लेकिन भाजपा सरकार बेतुके तर्कों व झूठे तथ्यों से काले कृषि कानून थोपना चाहती है। किसान की मृत्यु के लिए भाजपा दोषी है। यादव ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘कोरोना का टीकाकरण एक संवेदनशील प्रक्रिया है इसीलिए भाजपा सरकार इसे कोई सजावटी-दिखावटी ईवेंट न समझे और पुख्ता इंतज़ामों के बाद ही इसे शुरू करे। ये लोगों के जीवन से जुड़ा विषय है अत: इसमें बाद में सुधार का खतरा नहीं उठाया जा सकता है। गरीबों के टीकाकरण की निश्चित तारीख घोषित हो। इसके पहले अखिलेश यादव ने शनिवार को कोरोना वायरस के टीके को लेकर नई बहस शुरू कर दी जिसके जवाब में भाजपा संगठन और सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश के बयान को देश के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का अपमान बताया। शनिवार को यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, ‘मैं तो नहीं लगवाऊंगा अभी टीका, मैंने अपनी बात कह दी। वह भी भाजपा लगायेगी, उसका भरोसा करूं मैं। अरे जाओ भई, अपनी सरकार आयेगी तो सबको फ्री वैक्सीन लगेगी। हम भाजपा का टीका नहीं लगवा सकते।’ अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुये प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को टीके पर भरोसा नहीं है और यह देश के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का अपमान है। उन्होंने कहा, ‘अखिलेश यादव जी को टीके पर भरोसा नहीं है और उत्तर प्रदेश वासियों को उन पर (अखिलेश यादव) पर भरोसा नहीं है। उनका टीके पर सवाल उठाना, हमारे देश के चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों का अपमान है जिसके लिए उन्हें माफ़ी माननी चाहिए।’