खबरें देश की (Rashtra Pratham) :- गुजरात में धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन कानून बनाए जाने के बाद अंतर धार्मिक विवाह करना अपने आप में अपराध हो गया है। यहां एक हिंदू युवक अपनी मुस्लिम प्रेमिका से विवाह करना चाहता है, लेकिन परिवार में कानून के भय से उसे पहले अदालत की शरण लेनी पड़ी। विजातीय धर्म के युवक-युवती विवाह करना चाहते हैं, लेकिन परिवार व समाज के डर से इससे पहले उन्होंने हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की। गुजरात उच्च न्यायालय युवती को अहमदाबाद के पालड़ी स्थित नारी संरक्षण गृह में रखने की स्वीकृति दी है, उसे मंजूरी के बिना किसी को भी नहीं मिलने का भी निर्देश दिया है। गुजरात का एक हिंदू युवक मुस्लिम युवती से प्रेम करता है, उसने गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष अर्जी दाखिल कर अपनी प्रेमिका को परिवार के चंगुल से छुड़ाने की मांग की है।
उसका कहना है कि पिछले दो साल से वे एक-दूसरे को जानते हैं तथा एक-दूसरे को प्रेम करते हैं। प्रेमी जोड़ा विवाह करना चाहता है। इन दोनों को डर है कि विवाह पंजीकरण के लिए पहुंचने पर उन पर हमला हो सकता है। इससे पहले जब एक बार वह विवाह पंजीकरण के लिए पहुंचे तो कुछ लोगों ने वहां पहुंचकर हंगामा किया। इसके बाद वे विवाह पंजीकरण के बिना ही वापस लौट आए। अहमदाबाद के ही कारंज पुलिस थाने में उसने एक अर्जी देकर अपनी प्रेमिका को परिवार वालों के चंगुल से छुड़ाने की मांग की। पुलिस ने युवती को परिवार वालों से अलग करके अदालत के समक्ष पेश किया। जहां कोर्ट ने उसे नारी संरक्षण गृह में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। अदालत ने प्रशासन को आदेश दिया कि उक्त युवती से बिना मंजूरी के किसी को भी मिलने नहीं दिया जाए।
गौरतलब है कि गुजरात सरकार की ओर से बनाए गए गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन कानून 2021 जून में ही अमल में लाया गया था। इसके बाद से लव जिहाद के कई मामले सामने आए, लेकिन यह मामला अपने आप में अनूठा इसलिए है कि इसमें लड़का हिंदू तथा लड़की मुस्लिम है। वे दोनों अपनी मर्जी से विवाह करना चाहते हैं, लेकिन परिवार वालों के हिसाब उनको इस नए कानून से भी डर है, क्योंकि विवाह के बाद दोनों परिवारों में से कोई भी अगर शिकायत करता है तो उन पर यह कानून लागू हो सकता है।