क्या तालिबान को लेकर भारत के रुख में बदलाव के संकेत

Main Stories (Rashtra Pratham) :- अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद भारत और तालिबान के बीच कूटनीतिक र‍िश्‍तों को लेकर एक बहस चल रही है। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्‍या भारत को तालिबान हुकूमत के साथ अपने रिश्‍तों को सामान्‍य बनाना चाहिए या उनसे एक दूरी बनाकर रखना चाहिए। हालांकि, भारत का रुख अफगानिस्‍तान में लोकतांत्रिक सरकार का समर्थक और तालिबान का विरोधी रहा है। रूस में हुए मास्‍को फार्मेट वार्ता में तालिबान और भारत के प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद एक बार फ‍िर से यह सवाल उठ रहे हैं। आखिर भारत ऐसा क्‍यों कर रहा है। तालिबान हुकूमत के साथ भारत की वार्ता क्‍यों महत्‍वपूर्ण है। वैश्विक स्‍तर पर इससे क्‍या कुछ बदलने वाला है।

आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में एक्‍सपर्ट की क्‍या राय है।तालिबान हुकूमत के साथ वार्ता करनी चाहिए या नहीं यह बड़ा कूटनीतिक सवाल है। यह प्रश्‍न इसलिए अहम है क्‍यों कि भारत ने अफगानिस्‍तान में बड़े पैमने पर निवेश किया है। अगर भारत ने तालिबान के साथ पूरी तरह से रिश्‍ते खत्‍म कर दिए तो इसका प्रभाव सीधे उसके निवेश पर पड़ेगा। इसके अलावा कश्‍मीर में आतंकवादी संगठनों की सक्रियता को देखते हुए तालिबान भारत के लिए खास बन गया है। प्रो. पंत ने कहा कि अफगानिस्‍तान में तालिबान शासन एक सच्‍चाई है। भारत को इस सत्‍य को स्‍वीकार करना होगा और अपनी कूटनीति में बदलाव करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हालांकि, भारत ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।