बिहार के 18वें मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद

मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद

 28 November 1922 –  4 October 2011

इतिहास के झरोखों से (Rashtra Pratham): भागवत झा आजाद का जन्म अविभाजित बिहार के गोड्डा जिले के महगामा इलाके के कसबा गांव में हुआ था। अब यह गांव झारखंड में पड़ता है। उनकी पढ़ाई लिखाई भागलपुर में हुई और उसी दौरान जब वे एम.ए. कर रहे थे तभी भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हो गया जिसमें वे कूद पड़े। भारत छोड़ो आंदोलन के कारण उनकी पढ़ाई एक साल के लिए छूट भी गई लेकिन बाद में उन्होंने एम.ए. किया और कई घटनाओं के बाद बिहार के मुख्यमंत्री बने।

बिहार में कांग्रेस के जिन बड़े नेताओं के नाम की चर्चा होती है, उनमें एक नाम भागवत झा आजाद का भी है। बिहार के मुख्यमंत्री रहे आजाद ने केंद्रीय राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे आजाद ने केंद्र में भी कई मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। लंबे सियासी जीवन के बावजूद उन पर भ्रष्टाचार का दाग कभी नहीं लगा।

1922 में आज ही के दिन पैदा होने वाले आजाद ने भागलपुर संसदीय सीट से छह बार लोकसभा का चुनाव जीतने में कामयाबी हासिल की। 1983 का विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे पूर्व सांसद कीर्ति आजाद भागवत झा आजाद के पुत्र हैं। उनके नाम के साथ आजाद शब्द जोड़ने का एक दिलचस्प किस्सा है।

उनका मूल नाम भागवत झा था मगर उनके नाम के साथ आजाद शब्द जोड़ने का एक दिलचस्प किस्सा है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भागलपुर के सुल्तानगंज इलाके के कुछ नौजवानों ने दिल्ली से कोलकाता जाने वाली असलहों से लदी एक ट्रेन को लूटने की योजना बनाई। ब्रिटिश पुलिस भी काफी सतर्क थी और उसे इस योजना की जानकारी पहले ही मिल गई। पुलिस ने मौके पर दबिश देने के साथ वहां मौजूद लड़कों पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान कई नौजवान घायल हो गए।

भागवत झा की भी जांघ में गोली लगी और वे बेहोश होकर गिर गए। आसपास उनके मरने की खबर फैल गई। ब्रिटिश पुलिस घायल नौजवानों को गिरफ्तार करके अस्पताल ले जा रही थी। तय किया गया कि जिन नौजवानों की मौत हो गई है, उन्हें बाद में उठाया जाएगा। लेकिन इसी बीच भागवत को होश आ गया और वे कुछ लोगों की मदद से वहां से रफूचक्कर हो गए। बाकी सभी लोग गिरफ्तार कर लिए गए मगर वे आजाद हो गए और यहीं से उनके नाम के आगे आजाद शब्द जुड़ गया।