हाथरस में मनाई गई कस्तूरबा गांधी की जयंती

देश में महात्मा गांधी की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम होते हैं मगर उनकी पत्नी कस्तूरबा को याद करने के लिए बहुत कम स्थानों पर कार्यक्रम होते हैं हालांकि महात्मा गांधी को देश की आजादी के लिए प्रेरित करने में उनकी पत्नी कस्तूरबा का त्याग भी देश को आजादी दिलाने में कम नहीं है। वह भी महात्मा गांधी के साथ जेल में रहीं। अंग्रेजों की कैद में ही उनकी मृत्यु हुई। उनकी मृत्यु 22 फरवरी 1944 को हुई थी। वह देश को आजाद होते देख नहीं सकी थीं।

केंद्र सरकार ने उनकी याद को जीवंत रखने के लिए सन 1964 में एक डाक टिकट लगा लिफाफा जारी किया है तथा गांधी जी के साथ भी उनकी डाक टिकट युगल छवि के रूप में जारी की है जो आज दुर्लभ हो गईं हैं बहुत कम देखने को मिलती हैं। कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि पर हम देशवासी शत शत नमन करते हैं। शहर के डाक टिकट और पुराने सिक्को के संग्रह शैलेन्द्र वार्ष्णेय सर्राफ़ के पास तमाम पुराने विरासत के सिक्के और देश के आजादी दिलाने वाले और देश के महानायकों के डाक टिकट मौजूद है।