भारतीय विमानन इतिहास में कई विमान अपहरण की घटनाएं हुईं, जहां अदम्य साहस का परिचय दिया गया। नीरजा भनोट के बलिदान से लेकर कांधार संकट और अन्य घटनाओं में, इन जांबाजों ने हजारों फीट की ऊंचाई पर सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई।
विमान अपहरण यानी हाइजैकिंग विमानन इतिहास के सबसे खतरनाक और तनावपूर्ण अध्यायों में से एक रहा है। हजारों फीट की ऊंचाई पर जब सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी कुछ हथियारबंद लोगों के हाथ में चली जाती है, तब पायलट, केबिन क्रू और सुरक्षा बलों की सूझबूझ ही संकट की दिशा तय करती है।
नीरजा भनोट के अदम्य साहस से लेकर कांधार संकट में कैप्टन देवी शरण के धैर्य तक, ये घटनाएं आज भी याद की जाती हैं।
5 सितंबर 1986 को मुंबई से न्यूयार्क जा रही पैन एम की फ्लाइट 73 को कराची में अबू निडाल संगठन के चार सशस्त्र आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया था।
विमान में यात्रियों के साथ क्रू मेंबर्स की जिंदगी भी खतरे में थी। इसी दौरान एयर होस्टेस नीरजा भनोट ने असाधारण साहस का परिचय दिया। आतंकियों के काकपिट की ओर बढ़ते ही उन्होंने हाइजैक कोड सक्रिय कर दिया। इसके बाद तीनों अमेरिकी पायलट काकपिट हैच से बाहर निकलने में सफल रहे और विमान को उड़ान भरने से रोका जा सका।