World Hepatitis Day 2021: प्रेगनेन्सी के दौरान हेपेटाइटिस का होता है खतरा

स्वास्थ्य समाचार (Rashtra Pratham):-

विश्व हेपेटाइटिस दिवस बीमारी के बारे में जागरुकता पैदा करने का मौका होता है. प्रेगनेन्सी पर उसका प्रभाव अलग-अलग होता है. इसलिए इलाज, रोकथाम और खतरों को जानना जरूरी है.
हेपेटाइटिस एक वायरल बीमारी है जो लिवर में सूजन का कारण बनता है. हेपेटाइटिस की सबसे आम वजह वायरल संक्रमण है. लेकिन, उसके कई दूसरे कारण भी हैं. अलग-अलग वायरस हेपेटाइटिस पैदा करते हैं जिसमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के वायरस शामिल हैं. कम समय के लिए वायरल हेपेटाइटिस प्रेगनेन्सी में पीलिया का कारण बन सकता है. इलाज, रोकथाम और प्रेगनेन्सी पर प्रभाव हेपेटाइटिस की किस्मों के बीच महत्वपूर्ण रूप से अलग-अलग हो सकते हैं.
प्रेगनेन्सी के दौरान हेपेटाइटिस का दुष्प्रभाव
हेपेटाइटिस प्रेगनेन्सी को पेचीदा कर सकता है और कुछ महिलाओं में प्रेगनेन्सी हेपेटाइटिस को जटिल बना सकती है. प्रेगनेन्सी लंबे समय के लिए हेपेटाइटिस संक्रमण की वजह हो सकती है और लिवर के नुकसान का खतरा बढ़ा सकती है. लिहाजा, जरूरी है कि प्रेगनेन्सी के दौरान हेपेटाइटिस का इलाज किया जाए ताकि बीमारी के बढ़ने और बुरे प्रभाव के खतरे को कम किया जा सके. 
प्रेगनेन्ट महिलाओं में हेपेटाइटिस का जोखिम- वायरल हेपेटाइटस स्पष्ट रूप से मां और भ्रूण की सेहत को प्रभावित कर सकता है. उसके चलते समय से पहले जन्म हो सकता है. हेपेटाइटिस का ट्रांसमिशन भ्रूण तक हो सकता है जिससे कम समय और लंबे समय की समस्या हो सकती है. हेपेटाइटिस ई प्रेगनेन्सी के दौरान वायरल हेपेटाइटिस की सबसे गंभीर किस्म है, लेकिन ये सबसे आम नहीं है. इसके मुकाबले हेपेटाइटिस बी और सी ज्यादा आम हैं और वैक्सीन से रोकथाम की जा सकती है. प्रेगनेन्सी में ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस दूसरा जोखिम है. इलाज के लिए हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग के साथ प्रसव पूर्व देखभाल और नियमित चेकअप की सलाह दी जाती है.
इन लक्षणों को प्रेगनेन्ट महिलाएं दें ध्यान- हेपेटाइटिस से पीड़ित प्रेगनेन्ट महिलाओं को लक्षणों का पता होना चाहिए जो या तो संक्रमण या लिवर की बीमारी का संकेत होते हैं. मतली, उल्टी, भूख न लगना, पीलिया, स्किन और आंखों का पीला होना, यूरीन के रंग का काला पड़ना, स्किन के नीचे खून बहना या खरोंच लक्षणों में शामिल हैं. अगर उन लक्षणों में से कोई दिखाई देता है तो फौरन प्रसूति विशेषज्ञ के पास जाने की सलाह दी जाती है. समय से पहचान होना और रोकथाम करना कामयाब इलाज की बुनियाद हैं.