स्वास्थ्य समाचार (Rashtra Pratham) :- हर बार जब वायरस किसी व्यक्ति को संक्रमित करता है तो अपनी संख्या भी बढ़ाता है। इससे म्युटेशन और नए वैरिएंट का खतरा भी बढ़ता जाता है। फिलहाल तो इसका एक ही तोड़ है-ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जाए। अन्य देशों का तो तो नहीं पता, मगर यह तय है कि भारत में दूसरी लहर जैसे तांडव की पुनरावृत्ति नहीं होगी। हमारा टीकाकरण इसी गति से चला तो अगले साल तक शत-फीसद का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।दरअसल, दुनिया में टीके की उपलब्धता को लेकर एक तरह की असमानता है। वह यह कि उच्च और उच्च-मध्यम आय वाले देशों के पास जहां कुल टीकों का 81 फीसद उपलब्ध है, निम्न आय वाले देशों में इसकी उपलब्धता मात्र 0.4 फीसद है।
यह एक गंभीर मसला है। जब तक अमीर देश इस अंतर को भरने के लिए आगे नहीं आएंगे, हम वैश्विक स्तर पर कोरोना के नए वैरिएंट का मुकाबला करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।बहरहाल, वैक्सीन का सकारात्मक प्रभाव दुनिया के कई देशो में देखा जा सकता है। हालांकि ब्रेकथ्रू संक्रमण (टीके की दोनों डोज के बाद संक्रमित होना) बढ़े हैं, लेकिन ज्यादातर मामले गंभीर नहीं थे। यह समझना जरूरी है कि टीकाकरण का असर किसी व्यक्ति विशेष में न देखकर आबादी के समूह पर देखा जाता है। टीके की दोनों खुराक लेने के बाद भी मौत की खबरें आईं, मगर पूरी आबादी के परिप्रेक्ष्य में देखें तो इन्हें अस्पताल जाने या आक्सीजन की जरूरत लगभग नहीं पड़ रही है।