भारत कोरोना की दो लहरों को झेल चुका है. दूसरी लहर के बाद लोगों की जिंदगी सामान्य हो गई थी लेकिन कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन (Omicron Variant) ने लोगों के मन में दोबारा दहशत का माहौल बना दिया है. इस वेरिएंट का पता सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में चला है. इसके बाद यह भारत समेत 57 (Omicron Variant cases) देशों में पाया जा चुका है. नए म्यूटेशन के कारण कई बार यह वेरिएंट वैक्सीन को भी बेअसर करने में सफल होता है. ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या दो अलग-अलग कंपनी की वैक्सीन को मिक्स (Mixed Vaccine) करने से बेहतर रिजल्ट्स प्राप्त हो सकते हैं क्या. आइए जानते है कि रिसर्च से इस बारे में क्या पता चला है.
मिक्स वैक्सीनेशन क्या है?
कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन की खोज के बाद से ही लगातार यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या दो कंपनी के टीकों को मिक्स करके लगाने से इसका असर बढ़ सकता है. आपको बता दें कि मिक्स वैक्सीनेशन का मतलब है कि एक डोज किसी एक कंपनी की लगे वहीं दूसरी डोज किसी दूसरी कंपनी की हो. कुछ देशों ने अपने यहां बेहतर रिजल्ट्स के लिए मिक्स डोज (Mixed Vaccine Efficacy) को अपने यहां अनुमति भी दी है.
ओमिक्रोन पर क्या होगा इसका असर
कुछ रिसर्च से यह पता चला है कि वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में कोरोना के गंभीर लक्षणों की संभावना कम हो जाती है. लेकिन, ओमिक्रोन में 30 से ज्यादा म्यूटेशन देखा गया है. ऐसे में वैक्सीन के प्रभाव पर अभी रिसर्च किया जा रहा है. लेकिन, कुछ रिसर्च से यह पता चला है कि मिक्स डोज से वैक्सीन के असर को बढ़ाया जा सकता है.
यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) ने कहा है कि वेक्टर और एमआरएनए वैक्सीन को मिलाकर यूज करने से बेहतर इम्युनिटी शरीर में तैयार हो सकती है. लैंसेट जर्नल में छपी रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और फाइजर-बायोटेक की पहली खुराक के नौ सप्ताह के Difference पर बाद में नोवामैक्स और मॉडर्ना की दूसरी डोज देकर शरीर में स्ट्रांग इम्यूनिटी को बनाया जा सकता है.
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