एम्स में पित्ताशय की सर्जरी में रोबोटिक तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है, जो पारंपरिक लैप्रोस्कोपी से एक महत्वपूर्ण कदम आगे है।
पित्ताशय (गाल ब्लैडर) की सर्जरी आम तौर पर सामान्य मानी जाती है, लेकिन कुछ मरीजों में ऑपरेशन के दौरान मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ज्यादा सूजन, पहले हुए संक्रमण के कारण अंदर चिपकाव, पुराने रोग के कारण बने निशान या आसपास के अंगों की बनावट सामान्य से अलग होने पर सर्जन के लिए ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
वहीं, ऐसी स्थिति में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी मददगार हो सकती है। एम्स के सर्जनों के अनुसार, इससे शरीर के अंदर का हिस्सा ज्यादा साफ दिखाई देता है और उपकरणों को अधिक नियंत्रित तरीके से चलाया जा सकता है।
एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग को विभिन्न विशेषज्ञताओं में 1500 से अधिक रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी का अनुभव है।
विभाग के प्रो. डॉ. हेमंगा के. भट्टाचार्जी ने कहा कि पित्ताशय की सर्जरी में सूजन और चिपकाव की वास्तविक स्थिति कई बार ऑपरेशन शुरू होने के बाद ही पता चलती है। ऐसी स्थिति में रोबोटिक तकनीक मुश्किल बनावट के बीच सर्जन को अधिक सटीक तरीके से काम करने में मदद कर सकती है।